⚔️ फ्रांसीसी क्रांति – कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान अध्याय 1
JAC/NCERT बोर्ड सिलेबस के अनुसार संपूर्ण अध्ययन सामग्री | क्रांति के कारण, घटनाक्रम, प्रमुख व्यक्तित्व, परिणाम, प्रभाव, MCQs और संशोधन नोट्स
फ्रांसीसी क्रांति
"फ्रांसीसी क्रांति" कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान (इतिहास) का पहला अध्याय है जो 1789 में फ्रांस में घटित ऐतिहासिक क्रांति के बारे में विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। क्रांति के कारण, घटनाक्रम, प्रमुख व्यक्तित्व, मानव अधिकार घोषणा, बास्तील का पतन, आतंक का राज और विश्व पर प्रभाव इस अध्याय के मुख्य विषय हैं।
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🔹 अध्याय का परिचय
"फ्रांसीसी क्रांति" कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक (इतिहास) का पहला अध्याय है। यह अध्याय 1789 में फ्रांस में घटित हुई ऐतिहासिक घटना के बारे में है जिसने न केवल फ्रांस बल्कि पूरे विश्व को प्रभावित किया। फ्रांसीसी क्रांति ने राजतंत्र को समाप्त कर गणतंत्र की स्थापना की, सामंतवाद को खत्म किया और स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुत्व के आदर्शों को स्थापित किया। इस अध्याय में हम फ्रांसीसी क्रांति के कारण, घटनाक्रम, प्रमुख व्यक्तित्व, परिणाम और विश्व पर इसके प्रभाव का अध्ययन करेंगे।
अध्याय के मुख्य सीखने के उद्देश्य:
- 18वीं शताब्दी में फ्रांसीसी समाज की संरचना और समस्याओं को समझना।
- फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारणों का विश्लेषण करना।
- क्रांति की प्रमुख घटनाओं और उनके क्रम को समझना।
- मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा के महत्व को समझना।
- क्रांति के प्रमुख व्यक्तित्वों और उनके योगदान को जानना।
- क्रांति के तत्काल और दीर्घकालिक परिणामों का विश्लेषण करना।
- फ्रांसीसी क्रांति के विश्वव्यापी प्रभाव को समझना।
- क्रांति के प्रतीकों और नारों का महत्व समझना।
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🔹 विस्तृत विषयवस्तु एवं विश्लेषण
फ्रांसीसी क्रांति के कारण
फ्रांसीसी क्रांति 1789 में अचानक नहीं हुई। इसके लिए लंबे समय से सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और बौद्धिक कारण जिम्मेदार थे। ये कारण मिलकर क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार करते रहे।
1. सामाजिक कारण (Social Causes):
तीन एस्टेट (Three Estates):
18वीं शताब्दी में फ्रांसीसी समाज तीन एस्टेट (वर्गों) में विभाजित था:
| एस्टेट | वर्ग | जनसंख्या | विशेषाधिकार | करों की स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| प्रथम एस्टेट | पादरी वर्ग (क्लर्जी) | लगभग 1% | सभी विशेषाधिकार, चर्च कर | करों से मुक्त |
| द्वितीय एस्टेट | कुलीन वर्ग (नोबेलिटी) | लगभग 2% | सामंती विशेषाधिकार, उच्च पद | करों से मुक्त |
| तृतीय एस्टेट | सामान्य जनता | लगभग 97% | कोई विशेषाधिकार नहीं | सभी कर देते थे |
तृतीय एस्टेट की स्थिति:
तृतीय एस्टेट में किसान, मजदूर, छोटे कारीगर, वकील, डॉक्टर, व्यापारी (बुर्जुआ) शामिल थे। इन पर सभी करों का बोझ था:
- टाइथ (Tithe): उपज का 1/10 भाग चर्च को
- टेल (Taille): प्रत्यक्ष कर
- गैबेले (Gabelle): नमक कर
- कोर्वी (Corvée): बेगार (बिना मजदूरी के श्रम)
- सामंती कर: जमींदारों को विभिन्न कर
2. आर्थिक कारण (Economic Causes):
- राजकोषीय संकट: राजकीय खजाना खाली
- अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम: फ्रांस ने अमेरिका की मदद की जिससे 2 अरब लिवरे का कर्ज
- अकाल और महँगाई: 1788-89 में भीषण अकाल, रोटी की कमी
- व्यापार और उद्योग मंदी: ब्रिटेन से प्रतिस्पर्धा
- कर संग्रह प्रणाली: अक्षम और भ्रष्ट
3. राजनीतिक कारण (Political Causes):
- राजा लुई सोलहवाँ की अयोग्यता: कमजोर और निर्णयहीन शासक
- रानी मैरी एंटोनेट: फिजूलखर्ची, "मैडम डेफिसिट" कहलाती थीं
- निरंकुश राजतंत्र: राजा का दैवीय अधिकार का सिद्धांत
- प्रशासनिक भ्रष्टाचार: उच्च पद खरीदे जाते थे
4. बौद्धिक कारण (Intellectual Causes):
प्रबोधन युग (एज ऑफ एनलाइटनमेंट) के दार्शनिकों ने क्रांति की बौद्धिक पृष्ठभूमि तैयार की:
| दार्शनिक | मुख्य विचार | प्रसिद्ध रचना | योगदान |
|---|---|---|---|
| वॉल्टेयर (1694-1778) |
धार्मिक सहिष्णुता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता | कैंडाइड | चर्च और राजतंत्र की आलोचना |
| मॉन्टेस्क्यू (1689-1755) |
शक्तियों का पृथक्करण | द स्पिरिट ऑफ लॉज़ | कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका का पृथक्करण |
| रूसो (1712-1778) |
सामान्य इच्छा, सामाजिक समझौता | द सोशल कॉन्ट्रैक्ट | लोकतंत्र और जनता की संप्रभुता |
| दिदेरो (1713-1784) |
विज्ञान और तर्क का महत्व | एनसाइक्लोपीडिया | ज्ञान का प्रसार |
5. तात्कालिक कारण (Immediate Causes):
- एस्टेट्स जनरल की बैठक (5 मई 1789): 175 वर्षों बाद बुलाई गई
- मतदान प्रणाली पर विवाद: प्रति एस्टेट मत vs प्रति सदस्य मत
- राष्ट्रीय सभा की घोषणा (17 जून 1789): तृतीय एस्टेट द्वारा
- टेनिस कोर्ट की शपथ (20 जून 1789): संविधान बनाने तक नहीं टूटेंगे
प्रमुख घटनाएँ एवं व्यक्तित्व
फ्रांसीसी क्रांति की घटनाएँ तेजी से घटित हुईं और पूरे फ्रांस को बदल दिया। इन घटनाओं में कई महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों ने प्रमुख भूमिका निभाई।
क्रांति की प्रमुख घटनाओं का कालक्रम:
1789:
- 5 मई: एस्टेट्स जनरल की बैठक वर्साय में
- 17 जून: तृतीय एस्टेट द्वारा राष्ट्रीय सभा की घोषणा
- 20 जून: टेनिस कोर्ट की शपथ (संविधान बनाने तक नहीं टूटेंगे)
- 14 जुलाई: बास्तील का पतन - क्रांति की शुरुआत
- बास्तील पेरिस का किला था जो राजतंत्र की निरंकुश सत्ता का प्रतीक था
- लोगों ने किले पर हमला किया और कैदियों को मुक्त किया
- यह तिथि फ्रांस में राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाई जाती है
- 4 अगस्त: सामंतवाद का अंत - विशेषाधिकार समाप्त
- 26 अगस्त: मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा
- 17 धाराएँ, मानवाधिकारों का पहला घोषणापत्र
- स्वतंत्रता, समानता, संपत्ति के अधिकार की घोषणा
- कानून के समक्ष समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
- 5-6 अक्टूबर: वर्साय पर महिलाओं का मार्च - राजा को पेरिस लाया गया
1790-1791:
- 1790: चर्च की संपत्ति का राष्ट्रीयकरण
- 1791: संविधान का निर्माण - संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना
- 20 जून 1791: राजा का भागने का प्रयास (वेरेन्स की उड़ान) - विफल
1792:
- अप्रैल 1792: ऑस्ट्रिया और प्रशिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा
- 10 अगस्त 1792: ट्यूलरी महल पर हमला - राजतंत्र समाप्त
- 21 सितंबर 1792: गणतंत्र की घोषणा - पहला फ्रांसीसी गणतंत्र
- नवंबर 1792: राजा के गुप्त दस्तावेजों का पता चलना
1793:
- 21 जनवरी 1793: राजा लुई सोलहवाँ का सिर कलम
- 16 अक्टूबर 1793: रानी मैरी एंटोनेट का सिर कलम
- जून 1793 - जुलाई 1794: आतंक का राज (रॉब्सपिएर)
- समिति ऑफ पब्लिक सेफ्टी का गठन
- हजारों लोगों को गिलोटिन पर चढ़ाया गया
- संदेह के आधार पर गिरफ्तारी और मृत्युदंड
1794-1799:
- 28 जुलाई 1794: रॉब्सपिएर का सिर कलम - आतंक का अंत
- 1795: डाइरेक्टरी (5 सदस्यीय शासन) की स्थापना
- 1799: नेपोलियन बोनापार्ट द्वारा तख्तापलट - सत्ता पर कब्जा
प्रमुख व्यक्तित्व:
| व्यक्तित्व | पद/योगदान | महत्वपूर्ण तथ्य | अंत |
|---|---|---|---|
| लुई सोलहवाँ (1754-1793) |
फ्रांस का राजा (1774-1792) | अयोग्य शासक, निर्णयहीन, दैवीय अधिकार में विश्वास | 21 जनवरी 1793 को गिलोटिन |
| मैरी एंटोनेट (1755-1793) |
रानी (ऑस्ट्रिया की राजकुमारी) | "मैडम डेफिसिट", फिजूलखर्ची, "रोटी नहीं तो केक खाओ" | 16 अक्टूबर 1793 को गिलोटिन |
| मैक्सिमिलियन रॉब्सपिएर (1758-1794) |
जैकोबिन नेता, आतंक के राज का प्रमुख | "द इनकररप्टिबल", क्रांति की शुद्धता में विश्वास | 28 जुलाई 1794 को गिलोटिन |
| जॉर्जेस डैन्टन (1759-1794) |
क्रांतिकारी नेता, वकील | समिति ऑफ पब्लिक सेफ्टी के संस्थापक | 5 अप्रैल 1794 को गिलोटिन |
| नेपोलियन बोनापार्ट (1769-1821) |
सेनापति, फ्रांस का सम्राट | 1799 में सत्ता संभाली, 1804 में सम्राट बना | 1821 में सेंट हेलेना में निर्वासन में मृत्यु |
| मिराब्यू (1749-1791) |
राजनेता, वक्ता | संवैधानिक राजतंत्र के समर्थक | 1791 में प्राकृतिक मृत्यु |
क्रांति के प्रतीक:
- बास्तील का किला: निरंकुश सत्ता का प्रतीक
- लाल टोपी (फ्रिजियन कैप): स्वतंत्रता का प्रतीक
- तिकोनी टोपी: स्वतंत्रता का प्रतीक
- गिलोटिन: समानता का प्रतीक (सबके लिए एक जैसी मृत्यु)
- कांटों का मुकुट: बलिदान का प्रतीक
- ब्रेड (रोटी): जीवन की मूलभूत आवश्यकता
परिणाम एवं प्रभाव
फ्रांसीसी क्रांति का न केवल फ्रांस बल्कि पूरे विश्व पर गहरा प्रभाव पड़ा। इसने राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन किए।
फ्रांस पर प्रभाव:
1. राजनीतिक परिणाम:
- राजतंत्र का अंत: 1000 वर्ष पुराने राजतंत्र का अंत
- गणतंत्र की स्थापना: पहला फ्रांसीसी गणतंत्र (1792)
- लोकतांत्रिक सिद्धांतों की स्थापना: लोकप्रिय संप्रभुता
- निरंकुश शासन का अंत: संवैधानिक सरकार
- नेपोलियन का उदय: 1799 में सत्ता में आया
2. सामाजिक परिणाम:
- सामंतवाद का अंत: 4 अगस्त 1789 को सामंती विशेषाधिकार समाप्त
- सामाजिक समानता: कानून के समक्ष सभी समान
- विशेषाधिकारों का अंत: पादरी और कुलीन वर्ग के विशेषाधिकार समाप्त
- धर्मनिरपेक्षता: चर्च और राज्य का पृथक्करण
- चर्च का राष्ट्रीयकरण: चर्च की संपत्ति जब्त
3. आर्थिक परिणाम:
- कर प्रणाली में सुधार: समान कर प्रणाली
- संपत्ति का पुनर्वितरण: चर्च और कुलीनों की संपत्ति का वितरण
- व्यापार और उद्योग को बढ़ावा: आंतरिक व्यापार बाधाएँ समाप्त
- मुद्रा में सुधार: नई मुद्रा (फ्रैंक) की शुरुआत
- माप-तौल की मानक प्रणाली: मीट्रिक प्रणाली की शुरुआत
4. सांस्कृतिक परिणाम:
- राष्ट्रीय भावना का विकास: "फ्रांसीसी" की पहचान
- शिक्षा का प्रसार: सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली
- कला और साहित्य: क्रांतिकारी विषयों पर केंद्रित
- नए प्रतीकों का निर्माण: तिरंगा झंडा, मार्सिलेज (राष्ट्रगान)
यूरोप और विश्व पर प्रभाव:
1. राष्ट्रवाद का प्रसार:
- फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रवाद की भावना को जन्म दिया
- यूरोप के अन्य देशों में राष्ट्रीय एकता आंदोलन
- इटली और जर्मनी का एकीकरण
- औपनिवेशिक देशों में स्वतंत्रता आंदोलन
2. लोकतंत्र का प्रसार:
- लोकतांत्रिक सिद्धांतों का यूरोप में प्रसार
- संवैधानिक सरकारों की स्थापना
- मताधिकार और प्रतिनिधित्व का विचार
3. मानवाधिकारों की अवधारणा:
- मानवाधिकारों के विचार का वैश्विक प्रसार
- अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स (1791) पर प्रभाव
- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार घोषणापत्र (1948) का आधार
4. यूरोपीय युद्ध:
- क्रांतिकारी और नेपोलियन युद्ध (1792-1815)
- फ्रांस vs यूरोपीय गठबंधन (ऑस्ट्रिया, प्रशिया, ब्रिटेन, रूस)
- वियना कांग्रेस (1815): नेपोलियन के पतन के बाद यूरोप का पुनर्गठन
5. उपनिवेशों पर प्रभाव:
- हैती क्रांति (1791-1804): पहली सफल दास विद्रोह
- लैटिन अमेरिकी स्वतंत्रता आंदोलन (साइमन बोलिवर)
- भारतीय राष्ट्रवाद पर प्रभाव (राजा राममोहन राय)
क्रांति की सीमाएँ और आलोचनाएँ:
- आतंक का राज: हजारों निर्दोष लोगों की हत्या
- महिलाओं की उपेक्षा: महिलाओं को मताधिकार नहीं मिला
- गरीबों की स्थिति: आर्थिक समानता नहीं आई
- साम्राज्यवाद का उदय: नेपोलियन का साम्राज्यवाद
- विदेशी युद्ध: यूरोप में 23 वर्ष तक युद्ध
फ्रांसीसी क्रांति की विरासत:
- आधुनिक लोकतंत्र का जन्म: प्रतिनिधि लोकतंत्र
- मानवाधिकारों की अवधारणा: मौलिक अधिकारों का विचार
- राष्ट्रवाद: राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता
- धर्मनिरपेक्षता: धर्म और राज्य का पृथक्करण
- सामाजिक न्याय: समानता और न्याय का आदर्श
- क्रांति का नारा: "स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व" - आज भी प्रासंगिक
महत्वपूर्ण तथ्य:
| घटना | तिथि | महत्व |
|---|---|---|
| बास्तील का पतन | 14 जुलाई 1789 | क्रांति की शुरुआत, फ्रांस का राष्ट्रीय दिवस |
| मानव अधिकार घोषणा | 26 अगस्त 1789 | मानवाधिकारों का पहला घोषणापत्र |
| राजा का वध | 21 जनवरी 1793 | राजतंत्र का औपचारिक अंत |
| गणतंत्र की घोषणा | 21 सितंबर 1792 | पहला फ्रांसीसी गणतंत्र |
| नेपोलियन की सत्ता | 9 नवंबर 1799 | क्रांति का अंत, सैन्य शासन की शुरुआत |
फ्रांसीसी क्रांति और भारत:
- राजा राममोहन राय: फ्रांसीसी क्रांति से प्रभावित, लिबर्टी, इक्वलिटी शब्दों का प्रयोग
- भारतीय राष्ट्रवाद: स्वतंत्रता, समानता के आदर्शों ने प्रभावित किया
- भारतीय संविधान: मौलिक अधिकार फ्रांसीसी घोषणा से प्रेरित
- तिरंगा झंडा: फ्रांसीसी तिरंगे से प्रेरणा
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नीचे दिए गए 10 प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास करें। प्रत्येक प्रश्न के लिए सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या "उत्तर दिखाएँ" बटन पर क्लिक करके देखी जा सकती है। ये प्रश्न JAC बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित हैं।
फ्रांसीसी क्रांति 1789 में शुरू हुई। 14 जुलाई 1789 को बास्तील के किले के पतन के साथ क्रांति की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। यह तिथि फ्रांस में राष्ट्रीय दिवस (बास्तील दिवस) के रूप में मनाई जाती है। 1789 की घटनाओं में एस्टेट्स जनरल की बैठक (5 मई), राष्ट्रीय सभा की घोषणा (17 जून), टेनिस कोर्ट की शपथ (20 जून), बास्तील का पतन (14 जुलाई), सामंतवाद का अंत (4 अगस्त) और मानव अधिकार घोषणा (26 अगस्त) शामिल हैं। फ्रांसीसी क्रांति आधुनिक विश्व की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं में से एक है जिसने पूरे यूरोप और विश्व को प्रभावित किया।
फ्रांसीसी क्रांति का नारा "स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व" (Liberty, Equality, Fraternity) था। यह नारा फ्रांसीसी क्रांति का मूल मंत्र बना और आज भी फ्रांसीसी गणतंत्र का आदर्श वाक्य है।
1. स्वतंत्रता (Liberty): व्यक्तिगत स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता
2. समानता (Equality): कानून के समक्ष समानता, अवसर की समानता, सामाजिक समानता
3. बंधुत्व (Fraternity): भाईचारा, एकता, सहयोग
यह नारा मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा (1789) में प्रतिबिंबित हुआ और आधुनिक लोकतंत्र का आधार बना। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भी इसी तरह के आदर्शों (स्वतंत्रता, समानता, न्याय) का उल्लेख है।
बास्तील का पतन 14 जुलाई 1789 को हुआ था। बास्तील पेरिस का एक किला था जो राजतंत्र की निरंकुश सत्ता का प्रतीक था। यहाँ राजनीतिक कैदियों को रखा जाता था और इसका नाम सुनकर लोग कांपते थे।
घटना: पेरिस के लोगों ने किले पर हमला किया क्योंकि उन्हें लगा कि वहाँ हथियार और बारूद भंडारित हैं। हमले में किले का गवर्नर बर्नार्ड-रेने जॉर्डन डी लॉने मारा गया और कैदियों को मुक्त कर दिया गया।
महत्व: बास्तील का पतन फ्रांसीसी क्रांति का प्रतीक बन गया। यह तिथि फ्रांस में राष्ट्रीय दिवस (बास्तील दिवस) के रूप में मनाई जाती है। इस घटना ने दिखाया कि आम जनता की शक्ति राजतंत्र को चुनौती दे सकती है।
फ्रांसीसी क्रांति के समय फ्रांस का राजा लुई सोलहवाँ (Louis XVI) था जिसे 1793 में गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया था।
लुई सोलहवाँ (1754-1793):
- शासनकाल: 1774-1792
- विवाह: ऑस्ट्रिया की राजकुमारी मैरी एंटोनेट से
- चरित्र: अयोग्य, निर्णयहीन, दैवीय अधिकार में विश्वास
- आलोचना: फिजूलखर्ची, अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में फ्रांस की भागीदारी से भारी कर्ज
- महत्वपूर्ण घटनाएँ: एस्टेट्स जनरल की बैठक बुलाना (1789), वेरेन्स की उड़ान (भागने का असफल प्रयास, 1791)
- अंत: 21 जनवरी 1793 को गिलोटिन पर चढ़ाया गया
लुई सोलहवाँ बोर्बोन वंश का अंतिम राजा था। उसकी कमजोर नेतृत्व क्षमता और निर्णयहीनता ने क्रांति को बढ़ावा दिया। उसके वध के साथ फ्रांस में राजतंत्र का अंत हुआ।
'मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा' (Declaration of the Rights of Man and Citizen) 26 अगस्त 1789 में की गई थी। यह फ्रांसीसी क्रांति का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज था।
मुख्य बिंदु:
1. 17 धाराएँ, मानवाधिकारों का पहला घोषणापत्र
2. स्वतंत्रता, समानता, संपत्ति के अधिकार की घोषणा
3. कानून के समक्ष समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
4. धार्मिक स्वतंत्रता, न्यायिक सुरक्षा
5. करों का समान वितरण, सरकार की जवाबदेही
प्रभाव: यह घोषणा आधुनिक मानवाधिकार घोषणाओं की जननी मानी जाती है। इसने अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स (1791) और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार घोषणापत्र (1948) को प्रभावित किया। इसकी प्रस्तावना में कहा गया: "मनुष्य स्वतंत्र पैदा होते हैं और स्वतंत्र रहते हैं। सामाजिक भेद केवल सामान्य हित के आधार पर हो सकते हैं।"
18वीं शताब्दी में फ्रांसीसी समाज तीन एस्टेट (Estates) में विभाजित था:
1. प्रथम एस्टेट (First Estate): पादरी वर्ग (क्लर्जी)
- जनसंख्या: लगभग 1%
- विशेषाधिकार: सभी विशेषाधिकार, चर्च कर वसूलने का अधिकार
- करों की स्थिति: करों से मुक्त
2. द्वितीय एस्टेट (Second Estate): कुलीन वर्ग (नोबेलिटी)
- जनसंख्या: लगभग 2%
- विशेषाधिकार: सामंती विशेषाधिकार, उच्च पद, भूमि के स्वामी
- करों की स्थिति: करों से मुक्त
3. तृतीय एस्टेट (Third Estate): सामान्य जनता
- जनसंख्या: लगभग 97% (किसान, मजदूर, बुर्जुआ, वकील, डॉक्टर)
- विशेषाधिकार: कोई विशेषाधिकार नहीं
- करों की स्थिति: सभी कर देते थे (टाइथ, टेल, गैबेले, कोर्वी)
यह सामाजिक असमानता और विशेषाधिकारों की प्रणाली फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारणों में से एक थी। तृतीय एस्टेट पर सभी करों का बोझ था जबकि पहले दो एस्टेट करों से मुक्त थे।
'आतंक का राज' (Reign of Terror) 1793-1794 में मैक्सिमिलियन रॉब्सपिएर (Maximilien Robespierre) के नेतृत्व में चला जिसमें हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।
आतंक का राज (5 सितंबर 1793 - 28 जुलाई 1794):
1. कारण: बाहरी युद्ध (ऑस्ट्रिया, प्रशिया), आंतरिक विद्रोह, आर्थिक संकट
2. नेतृत्व: रॉब्सपिएर और समिति ऑफ पब्लिक सेफ्टी
3. उद्देश्य: क्रांति को बचाना, देशद्रोहियों को समाप्त करना
4. विशेषताएँ:
- संदेह के आधार पर गिरफ्तारी और मृत्युदंड
- गिलोटिन पर निरंतर निष्पादन
- विरोधियों का दमन (जिरोंदिस्त, डैन्टन)
- नई धार्मिक नीति (सर्वोच्च प्राणी की पूजा)
5. पीड़ित: लगभग 16,000-40,000 लोग मारे गए
6. अंत: 28 जुलाई 1794 (थर्मीडोर की प्रतिक्रिया) में रॉब्सपिएर को गिलोटिन पर चढ़ाया गया
रॉब्सपिएर को "द इनकररप्टिबल" (अपरिवर्तनीय) कहा जाता था। उसका मानना था कि क्रांति की शुद्धता बनाए रखने के लिए आतंक आवश्यक है।
फ्रांस में 21 सितंबर 1792 को गणतंत्र की घोषणा की गई और राजतंत्र को समाप्त कर दिया गया।
पृष्ठभूमि:
1. 10 अगस्त 1792: ट्यूलरी महल पर हमला, राजा को कैद किया गया
2. सितंबर 1792: नेशनल कन्वेंशन की पहली बैठक
3. 21 सितंबर 1792: राजतंत्र को समाप्त करने और गणतंत्र की घोषणा का प्रस्ताव पारित
4. 22 सितंबर 1792: पहले फ्रांसीसी गणतंत्र की आधिकारिक घोषणा
महत्व:
1. 1000 वर्ष पुराने राजतंत्र का अंत
2. पहला फ्रांसीसी गणतंत्र (प्रथम गणतंत्र) की स्थापना
3. "राजा लुई सोलहवाँ" से "नागरिक लुई कैपेट" हो गया
4. नया कैलेंडर शुरू: 22 सितंबर 1792 = 1 वेंडेमिएर वर्ष 1
बाद की घटनाएँ:
1. जनवरी 1793: लुई सोलहवाँ का वध
2. अक्टूबर 1793: मैरी एंटोनेट का वध
3. 1793-1794: आतंक का राज
4. 1799: नेपोलियन द्वारा तख्तापलट
फ्रांसीसी गणतंत्र ने "स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व" को अपना आदर्श बनाया।
कार्ल मार्क्स फ्रांसीसी क्रांति के दार्शनिक नहीं थे। वे 19वीं शताब्दी के थे और उनका जन्म 1818 में हुआ था, जबकि फ्रांसीसी क्रांति 1789 में हुई थी। मार्क्स ने कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो (1848) लिखा और समाजवादी विचारधारा विकसित की।
फ्रांसीसी क्रांति को प्रभावित करने वाले दार्शनिक:
1. वॉल्टेयर (1694-1778): धार्मिक सहिष्णुता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, चर्च और राजतंत्र की आलोचना। प्रसिद्ध रचना: कैंडाइड।
2. रूसो (1712-1778): सामान्य इच्छा, सामाजिक समझौता, लोकतंत्र और जनता की संप्रभुता। प्रसिद्ध रचना: द सोशल कॉन्ट्रैक्ट (1762)।
3. मॉन्टेस्क्यू (1689-1755): शक्तियों का पृथक्करण (कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका)। प्रसिद्ध रचना: द स्पिरिट ऑफ लॉज़ (1748)।
4. दिदेरो (1713-1784): विज्ञान और तर्क का महत्व, ज्ञान का प्रसार। प्रसिद्ध रचना: एनसाइक्लोपीडिया (28 खंड, 1751-1772)।
इन दार्शनिकों ने प्रबोधन युग (एज ऑफ एनलाइटनमेंट) में तर्क, विज्ञान, स्वतंत्रता और समानता के विचारों का प्रसार किया जिसने फ्रांसीसी क्रांति की बौद्धिक पृष्ठभूमि तैयार की।
नेपोलियन बोनापार्ट ने 9-10 नवंबर 1799 (18 ब्रुमेर वर्ष VIII) में एक सैन्य तख्तापलट के बाद फ्रांस की सत्ता संभाली।
नेपोलियन बोनापार्ट (1769-1821):
1. जन्म: कोर्सिका में 15 अगस्त 1769
2. सैन्य उदय: इटली और मिस्र अभियान में सफलता
3. तख्तापलट: 18 ब्रुमेर (9-10 नवंबर 1799) में डाइरेक्टरी को उखाड़ फेंका
4. सत्ता: प्रथम कॉन्सल बना (1799-1804)
5. सम्राट: 2 दिसंबर 1804 में फ्रांस का सम्राट बना
6. युद्ध: नेपोलियन युद्ध (1803-1815), यूरोप के अधिकांश भाग पर नियंत्रण
7. पतन: वाटरलू की लड़ाई (18 जून 1815) में हार
8. निर्वासन: सेंट हेलेना द्वीप, 1821 में मृत्यु
योगदान:
1. नेपोलियन कोड (1804): नागरिक संहिता, कानून के समक्ष समानता
2. बैंक ऑफ फ्रांस: वित्तीय स्थिरता
3. शिक्षा प्रणाली: लिसे (उच्च विद्यालय)
4. माप-तौल: मीट्रिक प्रणाली को मानकीकृत किया
नेपोलियन ने कहा: "क्रांति समाप्त हो गई है।" उसने क्रांति के कुछ सिद्धांतों (समानता) को बनाए रखा लेकिन स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया।
📋 संशोधन बिंदु (Revision Points)
- फ्रांसीसी क्रांति: 1789 ई. में शुरू
- 14 जुलाई 1789: बास्तील का पतन
- नारा: "स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व"
- फ्रांसीसी समाज: तीन एस्टेट
- प्रथम एस्टेट: पादरी वर्ग (1%)
- द्वितीय एस्टेट: कुलीन वर्ग (2%)
- तृतीय एस्टेट: सामान्य जनता (97%)
- क्रांति के कारण:
- सामाजिक: असमानता, विशेषाधिकार
- आर्थिक: करों का बोझ, राजकोषीय संकट
- राजनीतिक: लुई सोलहवाँ की अयोग्यता
- बौद्धिक: दार्शनिकों के विचार (वॉल्टेयर, रूसो, मॉन्टेस्क्यू)
- प्रमुख घटनाएँ:
- 1789: एस्टेट्स जनरल, बास्तील पतन, मानव अधिकार घोषणा
- 1791: संविधान निर्माण, राजा का भागने का प्रयास
- 1792: गणतंत्र की घोषणा (21 सितंबर)
- 1793: राजा और रानी का वध, आतंक का राज (रॉब्सपिएर)
- 1799: नेपोलियन की सत्ता (18 ब्रुमेर का तख्तापलट)
- प्रमुख व्यक्तित्व:
- लुई सोलहवाँ: अंतिम राजा, 1793 में वध
- मैरी एंटोनेट: रानी, "मैडम डेफिसिट"
- रॉब्सपिएर: आतंक के राज का नेता, 1794 में वध
- नेपोलियन: 1799 में सत्ता में आया, 1804 में सम्राट बना
- महत्वपूर्ण दस्तावेज:
- मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा: 26 अगस्त 1789
- 1791 का संविधान: संवैधानिक राजतंत्र
- नेपोलियन कोड: 1804, नागरिक संहिता
- प्रभाव:
- फ्रांस पर: राजतंत्र और सामंतवाद का अंत, गणतंत्र की स्थापना
- यूरोप पर: राष्ट्रवाद और लोकतंत्र का प्रसार, नेपोलियन युद्ध
- विश्व पर: मानवाधिकारों की अवधारणा, उपनिवेशों में स्वतंत्रता आंदोलन
- प्रतीक:
- बास्तील का किला: निरंकुश सत्ता का प्रतीक
- लाल टोपी (फ्रिजियन कैप): स्वतंत्रता का प्रतीक
- गिलोटिन: समानता का प्रतीक
- तिरंगा झंडा: नया राष्ट्रीय प्रतीक
- महत्वपूर्ण तिथियाँ:
- 14 जुलाई 1789: बास्तील पतन (राष्ट्रीय दिवस)
- 26 अगस्त 1789: मानव अधिकार घोषणा
- 21 जनवरी 1793: लुई सोलहवाँ का वध
- 21 सितंबर 1792: गणतंत्र की घोषणा
- 9 नवंबर 1799: नेपोलियन की सत्ता
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
A: फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारण:
1. सामाजिक कारण: तीन एस्टेट प्रणाली, सामाजिक असमानता, पादरी और कुलीन वर्ग के विशेषाधिकार, तृतीय एस्टेट पर करों का बोझ
2. आर्थिक कारण: राजकोषीय संकट, अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी से कर्ज, 1788-89 का भीषण अकाल, रोटी की कमी और महँगाई
3. राजनीतिक कारण: राजा लुई सोलहवाँ की अयोग्यता और निर्णयहीनता, रानी मैरी एंटोनेट की फिजूलखर्ची, निरंकुश राजतंत्र, प्रशासनिक भ्रष्टाचार
4. बौद्धिक कारण: प्रबोधन युग के दार्शनिकों के विचार - वॉल्टेयर (धार्मिक सहिष्णुता), रूसो (सामाजिक समझौता), मॉन्टेस्क्यू (शक्तियों का पृथक्करण)
5. तात्कालिक कारण: एस्टेट्स जनरल की बैठक (175 वर्षों बाद), मतदान प्रणाली पर विवाद, राष्ट्रीय सभा की घोषणा, टेनिस कोर्ट की शपथ
मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा (26 अगस्त 1789) का महत्व:
1. ऐतिहासिक महत्व: मानवाधिकारों का पहला घोषणापत्र, आधुनिक मानवाधिकार आंदोलन की नींव
2. मुख्य सिद्धांत: स्वतंत्रता, समानता, संपत्ति का अधिकार, कानून के समक्ष समानता
3. 17 धाराएँ: मौलिक अधिकारों की व्यापक सूची
4. राजनीतिक महत्व: दैवीय अधिकार के सिद्धांत का खंडन, लोकप्रिय संप्रभुता की अवधारणा
5. वैश्विक प्रभाव: अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स (1791), संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार घोषणापत्र (1948) पर प्रभाव
6. क्रांतिकारी महत्व: पुराने विशेषाधिकारों का अंत, नए लोकतांत्रिक सिद्धांतों की स्थापना
7. प्रस्तावना: "मनुष्य स्वतंत्र पैदा होते हैं और स्वतंत्र रहते हैं। सामाजिक भेद केवल सामान्य हित के आधार पर हो सकते हैं।"
यह घोषणा न केवल फ्रांस बल्कि पूरे विश्व के लोकतांत्रिक आंदोलनों के लिए प्रेरणा बनी और आधुनिक संवैधानिक लोकतंत्र का आधार स्थापित किया।
A: फ्रांसीसी क्रांति के यूरोप और विश्व पर प्रभाव:
1. राष्ट्रवाद का प्रसार: फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रवाद की भावना को जन्म दिया। यूरोप के अन्य देशों में राष्ट्रीय एकता आंदोलन शुरू हुए, जिससे इटली (1861) और जर्मनी (1871) का एकीकरण हुआ।
2. लोकतंत्र का प्रसार: लोकतांत्रिक सिद्धांतों का यूरोप में प्रसार हुआ। संवैधानिक सरकारों, मताधिकार और प्रतिनिधित्व के विचार ने जड़ जमाई।
3. मानवाधिकारों की अवधारणा: मानवाधिकारों के विचार का वैश्विक प्रसार हुआ। अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स (1791) और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिरक घोषणापत्र (1948) इससे प्रभावित थे।
4. उपनिवेशों पर प्रभाव: हैती क्रांति (1791-1804) - पहली सफल दास विद्रोह; लैटिन अमेरिकी स्वतंत्रता आंदोलन (साइमन बोलिवर); भारतीय राष्ट्रवाद पर प्रभाव (राजा राममोहन राय)
5. यूरोपीय युद्ध: क्रांतिकारी और नेपोलियन युद्ध (1792-1815) जिसमें फ्रांस vs यूरोपीय गठबंधन (ऑस्ट्रिया, प्रशिया, ब्रिटेन, रूस) लड़ा। वियना कांग्रेस (1815) में नेपोलियन के पतन के बाद यूरोप का पुनर्गठन किया गया।
6. सामाजिक परिवर्तन: सामंतवाद और विशेषाधिकारों का अंत, समानता और न्याय के आदर्शों का प्रसार
नेपोलियन बोनापार्ट और क्रांति की विरासत:
नेपोलियन ने 1799 में सत्ता संभाली और 1804 में फ्रांस का सम्राट बना। उसने क्रांति की विरासत को मिले-जुले तरीके से आगे बढ़ाया:
1. नेपोलियन कोड (1804): नागरिक संहिता जिसने कानून के समक्ष समानता, संपत्ति के अधिकार और धर्मनिरपेक्षता को स्थापित किया। यह कोड फ्रांस और नेपोलियन द्वारा जीते गए देशों में लागू किया गया।
2. क्रांति के सिद्धांतों का प्रसार: नेपोलियन ने यूरोप के विभिन्न देशों में क्रांति के सिद्धांतों (समानता, धर्मनिरपेक्षता) का प्रसार किया, हालाँकि स्वतंत्रता को दबा दिया।
3. सामंतवाद का अंत: नेपोलियन ने जर्मनी, इटली, पोलैंड आदि देशों में सामंती व्यवस्था को समाप्त किया।
4. शिक्षा और प्रशासनिक सुधार: लिसे (उच्च विद्यालय) प्रणाली, बैंक ऑफ फ्रांस, मीट्रिक प्रणाली का मानकीकरण
5. सीमाएँ: नेपोलियन ने स्वतंत्रता को दबा दिया, प्रेस सेंसरशिप लागू की, और एक सैन्य तानाशाह बन गया। उसने कहा: "क्रांति समाप्त हो गई है।"
6. विरासत: नेपोलियन ने क्रांति के कुछ सिद्धांतों (समानता, धर्मनिरपेक्षता) को संरक्षित रखा लेकिन लोकतंत्र और स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया। उसका शासन क्रांति और पुराने शासन के बीच एक संक्रमण काल था।

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