Chapter – हिंदी क्षितिज (Class 10)
भदंत आनंद कौसल्यायन – संस्कृतिलेखक: भदंत आनंद कौसल्यायन
📘 भदंत आनंद कौसल्यायन – Chapter Based MCQs | Class 10
Class: 10
Book: क्षितिज भाग–2
Chapter: भदंत आनंद कौसल्यायन – संस्कृति
🔹 भूमिका
‘भदंत आनंद कौसल्यायन – संस्कृति’ पाठ में लेखक यह समझाते हैं कि *संस्कृति* और *सभ्यता* अलग हैं। संस्कृति वह मानसिक क्षमता है जो व्यक्ति को नई खोज, सोच और प्रेरणा देती है, जबकि सभ्यता उन खोजों और आविष्कारों का समाज में परिणाम है। यह पाठ हमें यह भी बताता है कि संस्कृति के बिना सभ्यता केवल बाहरी रूप होती है, और असंस्कृति समाज में विनाश और विघटन ला सकती है।
🔹 लेखक परिचय
भदंत आनंद कौसल्यायन एक बौद्ध भिक्षु, लेखक और समाज सुधारक थे। उनका जन्म पंजाब के अंबाला जिले में हुआ। उन्होंने देश और विदेश की यात्राएँ की और बौद्ध धर्म एवं संस्कृति के प्रचार‑प्रसार में अपना जीवन समर्पित किया। उनकी रचनाएँ जीवन के उच्च मूल्यों और मानव कल्याण की ओर प्रेरित करती हैं।
🔹 विस्तृत सारांश
पाठ में यह बताया गया है कि संस्कृति व्यक्ति की सोच, प्रेरणा और ज्ञान की शक्ति है। जब इंसान ने नई खोज की, जैसे आग, सुई‑धागा या कोई अन्य आविष्कार, तो यह संस्कृति की प्रेरणा का परिणाम था। सभ्यता उन खोजों का समाज में उपयोग है। असंस्कृति केवल बाहरी विकास है जो समाज को विनाश और अज्ञानता की ओर ले जाती है।
लेखक कहते हैं कि श्रेष्ठ संस्कृति वही है जो मानवता, ज्ञान, कल्याण और सकारात्मक कार्यों की ओर प्रेरित करे। पाठ का संदेश है कि सच्ची सभ्यता तभी संभव है जब उसका आधार संस्कृति और मानव हित हो।
🔹 शिक्षा / संदेश
यह पाठ हमें यह सिखाता है कि *संस्कृति केवल ज्ञान या तकनीक नहीं है*, बल्कि यह सोच, प्रेरणा और मानव कल्याण की दिशा में कार्य करने की क्षमता है। संस्कृति और सभ्यता का सही उपयोग तभी श्रेष्ठ है जब इसका उद्देश्य मानव हित हो।
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